मलाशय से रक्तस्राव (Rectal Bleeding): कारण, चेतावनी के संकेत और जाँचें

सामग्री की तालिका

मलाशय से रक्तस्राव पर इन्फोग्राफिक: कारण, लक्षण और चिकित्सकीय सहायता कब लेनी चाहिए।.
मलाशय से रक्तस्राव के कारणों, लक्षणों और सहायता कब लेनी चाहिए, इस बारे में एक आसानी से समझ में आने वाली मार्गदर्शिका।.

⚕️ यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। अपने परिणामों की व्याख्या के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श लें।.

मलाशय से रक्तस्राव (Rectal Bleeding) — यानी टॉयलेट पेपर पर, कमोड में या मल के साथ मिला हुआ खून — एक सामान्य समस्या है जिसके बारे में लोग अक्सर जानकारी खोजते हैं, और अधिकतर मामलों में इसका कारण गंभीर नहीं होता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे नज़रअंदाज़ करना सुरक्षित है। खून का रंग, उसकी मात्रा और साथ में आने वाले लक्षण — ये सब पाचन तंत्र के अलग-अलग हिस्सों और अलग-अलग स्तर की तात्कालिकता की ओर इशारा करते हैं। इस लेख में आप जानेंगे कि चमकीला लाल, गहरा लाल और काला-चिपचिपा मल (Melena) क्या संकेत देते हैं, किन स्थितियों में रक्तस्राव सबसे अधिक होता है, किन परिस्थितियों में उसी दिन आपातकालीन देखभाल ज़रूरी है और कौन-सी स्थिति में नियमित अपॉइंटमेंट का इंतज़ार किया जा सकता है, और डॉक्टर मल परीक्षण (Stool Test), रक्त परीक्षण (Blood Test) और एंडोस्कोपी (Endoscopy) के ज़रिए रक्तस्राव का स्रोत कैसे खोजते हैं।

खून का रंग यह बताता है कि वह कहाँ से आ रहा है

पाचन तंत्र से गुज़रते समय खून का रंग बदलता जाता है। पाचक एंजाइम और आंत के बैक्टीरिया लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद आयरन युक्त प्रोटीन हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) को तोड़ते हैं — यह प्रक्रिया जितनी लंबी चलती है, रंग उतना ही गहरा होता जाता है। इसलिए रंग एक मोटे तौर पर दूरी का संकेत देता है: खून जितना चमकीला होगा, उसका स्रोत गुदा (Anus) के उतना ही करीब होगा।

यह किसी डॉक्टर से बातचीत की शुरुआत है, न कि कोई निदान (Diagnosis)। आंत के ऊपरी हिस्से से तेज़ रक्तस्राव भी लाल दिख सकता है क्योंकि वह जल्दी बाहर आ जाता है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थ भी खून जैसे दिखते हैं। चुकंदर, लाल जेलेटिन और टमाटर की चटनी मल को लाल रंग दे सकते हैं, जबकि आयरन की गोलियाँ, बिस्मथ युक्त पेट की दवाएँ, काली मुलेठी (Black Licorice) और ब्लूबेरी मल को गहरा कर सकते हैं।

आप क्या देखते हैंइसका आमतौर पर क्या मतलब है
पेपर पर चमकीला लाल खून या कमोड में टपकता खून, मल सामान्यगुदा (Anus) या निचला मलाशय (Lower Rectum)। बवासीर (Hemorrhoids) और गुदा विदर (Anal Fissure) इसके सामान्य कारण हैं।
मल में मिला हुआ चमकीला लाल खूनमलाशय (Rectum), सिग्मॉइड कोलन (Sigmoid Colon) या बाईं आंत (Left Colon)। पॉलिप्स (Polyps), डाइवर्टिकुला (Diverticula), सूजन या ट्यूमर की संभावना अधिक हो जाती है।
गहरा लाल या मैरून रंग का खून, कभी-कभी थक्कों के साथबड़ी आंत (Colon) का ऊपरी हिस्सा या छोटी आंत (Small Intestine)। ऊपरी हिस्से से तेज़ रक्तस्राव भी ऐसा दिख सकता है।
काला, चिपचिपा, तारकोल जैसा मल जिसमें तेज़ दुर्गंध हो (मेलेना / Melena)पेट (Stomach), ग्रहणी (Duodenum) या ऊपरी छोटी आंत (Upper Small Intestine)। रास्ते में खून पच जाता है।
कुछ दिखाई नहीं देता, लेकिन मल परीक्षण (Stool Test) में रक्त (Occult Blood) का पता चलता हैपाचन तंत्र में कहीं भी धीमी, लगातार रक्त हानि। यह अक्सर किसी पॉलिप (Polyp) या शुरुआती कैंसर का पहला संकेत होता है।

रक्त उन कई चीज़ों में से एक है जो मल के रंग-रूप को बदल सकती हैं, और एक संबंधित लेख में बताया गया है सामान्य और असामान्य मल की स्थिरता (Consistency) कैसी दिखती है। छोटे गहरे धब्बे एक अलग विषय हैं, और एक अन्य गाइड में इसे समझाया गया है मल में काले धब्बों के संभावित कारण.

मलाशय से रक्तस्राव (Rectal Bleeding) के पीछे के मुख्य कारण

बवासीर (Hemorrhoids) और गुदा विदर (Anal Fissure)

50 वर्ष से कम आयु के लोगों में दिखाई देने वाले अधिकांश रक्तस्राव के लिए ये दोनों ही ज़िम्मेदार होते हैं। बवासीर (Hemorrhoids) गुदा नलिका (Anal Canal) के अंदर या ठीक बाहर सूजी हुई रक्त वाहिकाएँ होती हैं; आंतरिक बवासीर आमतौर पर बिना दर्द के रक्तस्राव करती है, जिससे मल पर चमकीला लाल रक्त लग जाता है या मल त्याग के बाद कमोड में टपकता है। गुदा विदर (Anal Fissure) गुदा नलिका की परत में एक छोटी-सी दरार होती है, जो आमतौर पर कठोर मल के कारण होती है, और मल त्याग के दौरान व बाद में तेज़, चुभने वाले दर्द तथा टिशू पेपर पर रक्त की लकीर के रूप में सामने आती है। एक विस्तृत गाइड में बताया गया है बवासीर के कारण, उपचार और बचाव के उपाय। गुदा द्वार पर अचानक दर्दनाक नीला-बैंगनी उभार अधिकतर एक थक्केदार नस (Clotted Vein) हो सकता है, और एक लेख में बताया गया है पेरिअनल हेमाटोमा (Perianal Hematoma) के लक्षण और उपचार.

डायवर्टीकुलर ब्लीडिंग (Diverticular Bleeding) और एंजियोडिसप्लेसिया (Angiodysplasia)

डायवर्टिकुला (Diverticula) छोटी-छोटी थैलियाँ होती हैं जो बृहदान्त्र (Colon) की दीवार के कमज़ोर हिस्सों से बाहर की ओर उभर आती हैं। ये 60 वर्ष की आयु के बाद बहुत सामान्य हो जाती हैं और आमतौर पर कोई लक्षण नहीं देती, लेकिन थैली की गर्दन पर खिंची हुई कोई रक्त वाहिका फट सकती है। इसका परिणाम विशिष्ट होता है: अचानक, बिना दर्द के, कभी-कभी गहरे लाल या मैरून रंग का भारी रक्तस्राव। एंजियोडिसप्लेसिया (Angiodysplasia) — बृहदान्त्र या छोटी आंत की दीवार में नाज़ुक, असामान्य रूप से चौड़ी छोटी रक्त वाहिकाएँ — वृद्ध वयस्कों में इसका दूसरा क्लासिक कारण है, और यह किसी नाटकीय घटना की बजाय अक्सर धीमी, बार-बार होने वाली रक्त हानि के रूप में सामने आता है।

पॉलिप्स (Polyps) और कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer)

पॉलिप्स (Polyps) बृहदान्त्र (Colon) या मलाशय (Rectum) की परत पर उगने वाली वृद्धियाँ होती हैं। अधिकांश हानिरहित होती हैं, लेकिन कुछ प्रकार वर्षों में धीरे-धीरे ऐसे बदलाव जमा करती हैं जो कैंसर में बदल सकते हैं। पॉलिप्स और ट्यूमर दोनों ही रुक-रुककर रक्तस्राव करते हैं, अक्सर इतनी कम मात्रा में कि दिखाई नहीं देता — यही कारण है कि अदृश्य रक्तस्राव उतना ही महत्वपूर्ण है जितना स्पष्ट रूप से दिखने वाला। एक अलग लेख में समीक्षा की गई है कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम कारक और उपचार.

इन्फ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ (Inflammatory Bowel Disease) और प्रोक्टाइटिस (Proctitis)

अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis) और क्रोहन रोग (Crohn's Disease) आंत की परत में सूजन और घाव पैदा करते हैं, और इनमें खून आना आमतौर पर दस्त, बार-बार शौच की तीव्र इच्छा, बलगम, पेट में मरोड़ जैसा दर्द, और कभी-कभी वजन घटने या बुखार के साथ होता है। प्रोक्टाइटिस (Proctitis) — यानी केवल मलाशय (Rectum) तक सीमित सूजन — पेल्विस पर रेडिएशन थेरेपी या कुछ संक्रमणों के बाद हो सकती है, जिनमें यौन संचारित संक्रमण भी शामिल हैं, या यह अल्सरेटिव कोलाइटिस का पहला संकेत हो सकती है। हमारी लाइब्रेरी में यह भी शामिल है क्रोहन रोग (Crohn's Disease) का निदान और दैनिक प्रबंधन. डॉक्टर अक्सर इस संदेह के साथ मल में सूजन की जांच (Stool Inflammation Marker) भी करवाते हैं, और एक संबंधित लेख में बताया गया है फेकल कैलप्रोटेक्टिन (Fecal Calprotectin) के परिणामों को कैसे समझें. जब हाल की यात्रा या दो हफ्तों से अधिक समय से चल रहे दस्त की बात हो, तो किसी संक्रामक कारण पर भी विचार करना जरूरी है, और एक अन्य गाइड में विस्तार से बताया गया है अंडे और परजीवी स्टूल टेस्ट (Ova and Parasites Stool Test).

कम सामान्य कारण

खून आना गुदा नालव्रण (Anal Fistula) या फोड़े (Abscess), सॉलिटरी रेक्टल अल्सर सिंड्रोम (Solitary Rectal Ulcer Syndrome), इस्केमिक कोलाइटिस (Ischemic Colitis) — यानी बड़ी आंत के किसी हिस्से में रक्त आपूर्ति का अस्थायी रूप से बंद होना, जो आमतौर पर बुजुर्गों में मरोड़ के दर्द और फिर खूनी दस्त के रूप में सामने आता है — रेक्टल प्रोलैप्स (Rectal Prolapse), या चोट से भी हो सकता है। पीला, चिकना और पानी पर तैरने वाला मल एक अलग समस्या है, जिसके बारे में एक गाइड में बताया गया है चिकने मल (Fatty Stool) के कारण और उपचार.

खून पतला करने वाली और दर्द निवारक दवाएं तस्वीर को कैसे बदलती हैं

दवाओं का इतिहास यह दोनों बातें प्रभावित करता है — खून आने की संभावना और किसी घटना को कितनी गंभीरता से लेना चाहिए।

  • एंटीकोएगुलेंट दवाएं (Anticoagulants) — जैसे वारफेरिन (Warfarin), अपिक्साबान (Apixaban), रिवेरोक्साबान (Rivaroxaban), एडोक्साबान (Edoxaban), डाबिगेट्रान (Dabigatran), हेपेरिन (Heparins) — खुद कोई घाव नहीं बनातीं, लेकिन पहले से मौजूद घाव से खून ज्यादा देर तक और अधिक मात्रा में बहने देती हैं।
  • एंटीप्लेटलेट दवाएं (Antiplatelet Drugs) जैसे एस्पिरिन (Aspirin) और क्लोपिडोग्रेल (Clopidogrel) एक अलग तरीके से काम करती हैं लेकिन असर मिलता-जुलता होता है, और जब दोनों एक साथ ली जाएं तो खतरा और बढ़ जाता है।
  • नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) — जैसे आइबुप्रोफेन (Ibuprofen), नेप्रोक्सेन (Naproxen), डाइक्लोफेनाक (Diclofenac) — पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत की परत को सीधे नुकसान पहुंचा सकती हैं, और ये ऊपरी व निचले दोनों हिस्सों में खून आने का एक जाना-माना कारण हैं।

खून आने पर अपने आप से कोई भी निर्धारित खून पतला करने वाली दवा बंद न करें। अचानक दवा बंद करने से खून के थक्के, स्ट्रोक और दिल के दौरे का खतरा हो सकता है। जिस डॉक्टर ने यह दवा लिखी है, उन्हें तुरंत फोन करें, जो आप देख रहे हैं वह ठीक-ठीक बताएं, और यह फैसला उन्हीं पर छोड़ें।

मलाशय से खून आना (Rectal Bleeding): कब तुरंत आपातकालीन देखभाल लें और कब अपॉइंटमेंट काफी है

यह वह सवाल है जो अधिकांश लोग वास्तव में जानना चाहते हैं, इसलिए इसे यथासंभव सरल भाषा में बताया जा रहा है। किसी भी दिखाई देने वाले रक्तस्राव (Bleeding) का चिकित्सीय मूल्यांकन ज़रूरी है, भले ही बवासीर (Hemorrhoids) जैसा कोई सामान्य कारण बहुत संभावित हो। दोनों एक साथ भी हो सकते हैं — बवासीर होने का मतलब यह नहीं कि पॉलिप (Polyp) नहीं हो सकता। जो बात एक स्थिति से दूसरी स्थिति में बदलती है, वह है — कितनी जल्दी डॉक्टर से मिलना चाहिए।

तत्कालता का स्तर (Level of Urgency)यह कैसा दिखता हैक्या करें
आज ही आपातकालीन देखभाल लेंभारी रक्तस्राव जो रुक न रहा हो, बड़े-बड़े थक्के, काला और रुका हुआ मल (Black Tarry Stool), खून या कॉफी की तलछट जैसी सामग्री की उल्टी, चक्कर आना, बेहोशी, दिल की धड़कन तेज़ होना, ठंडी और चिपचिपी त्वचा, भ्रम की स्थिति, या रक्तस्राव के साथ पेट में तेज़ दर्दकिसी आपातकालीन विभाग (Emergency Department) में जाएँ या 911 पर कॉल करें। खुद गाड़ी न चलाएँ। ये संकेत तेज़ या अधिक मात्रा में रक्त की हानि की ओर इशारा करते हैं, जिसका उसी दिन मूल्यांकन ज़रूरी है।
कुछ दिनों के भीतर अपॉइंटमेंट लेंमल में केवल टिशू पेपर पर नहीं, बल्कि पूरे मल में मिला हुआ खून; एक-दो हफ्तों से अधिक समय तक बार-बार होने वाला रक्तस्राव; मल की आदत में स्थायी बदलाव के साथ रक्तस्राव, बिना कारण वज़न कम होना, लगातार पेट दर्द, थकान, या सांस फूलना; 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र में कोई भी रक्तस्राव; एंटीकोएगुलेंट (Anticoagulant), एंटीप्लेटलेट दवा (Antiplatelet Drug), या नियमित NSAIDs लेते समय रक्तस्राव; कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer), पॉलिप (Polyps), या इन्फ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ (Inflammatory Bowel Disease) का व्यक्तिगत या पारिवारिक इतिहासअपने डॉक्टर से संपर्क करें और जल्द से जल्द मिलने का समय माँगें। जाँच के दौरान शारीरिक परीक्षण और अधिकांश मामलों में मल परीक्षण (Stool Test), रक्त परीक्षण (Blood Tests), या एंडोस्कोपी (Endoscopy) के लिए रेफरल की उम्मीद रखें।
नियमित अनुवर्ती जाँचकिसी युवा व्यक्ति में टिशू पेपर पर एक छोटी-सी खून की लकीर, जिसे पहले से बवासीर (Hemorrhoids) या सामान्य एनल फिशर (Anal Fissure) हो, कोई अन्य लक्षण न हो, और रक्तस्राव कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाएफिर भी अपनी अगली डॉक्टर विज़िट पर इसका उल्लेख ज़रूर करें। अगर यह दोबारा हो, अधिक हो जाए, या नए लक्षण दिखें, तो ऊपर वाली श्रेणी के अनुसार जल्दी डॉक्टर से मिलें।

दो स्थितियाँ अलग से ध्यान देने योग्य हैं। गर्भावस्था के दौरान रक्तस्राव आमतौर पर बवासीर के कारण होता है, लेकिन इसकी जानकारी हमेशा डॉक्टर को देनी चाहिए। और बच्चों में मल में खून आना कभी भी घर पर देखते रहने वाली बात नहीं है — इसके लिए उसी दिन बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) को फोन करना ज़रूरी है।

रेक्टल ब्लीडिंग (Rectal Bleeding) की जाँच कैसे की जाती है

शारीरिक परीक्षण और मल परीक्षण (Stool Testing)

डॉक्टर की विज़िट आमतौर पर मेडिकल हिस्ट्री से शुरू होती है — खून का रंग, मात्रा, कब होता है, दर्द, मल की आदत, दवाएँ, पारिवारिक इतिहास — और फिर गुदा क्षेत्र (Anal Area) की जाँच और डिजिटल रेक्टल एग्ज़ामिनेशन (Digital Rectal Examination) की जाती है। एनोस्कोपी (Anoscopy), एक छोटी और सख्त ट्यूब होती है जो गुदा नलिका (Anal Canal) को देखने के लिए खोली जाती है — यह क्लिनिक में ही कुछ ही सेकंड में आंतरिक बवासीर (Internal Hemorrhoids) या फिशर (Fissure) की पुष्टि कर सकती है।

जब स्रोत स्पष्ट न हो, तो अगला कदम मल में रक्त की जाँच (Stool Test for Blood) होता है। फेकल इम्यूनोकेमिकल टेस्ट (FIT) ऐसे एंटीबॉडी का उपयोग करता है जो विशेष रूप से मानव हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) को पहचानते हैं, इसलिए खाना और अधिकांश दवाएँ इसमें बाधा नहीं डालतीं और किसी विशेष खान-पान की तैयारी की भी ज़रूरत नहीं होती। पुराना गुआयाक-आधारित फेकल ऑकल्ट ब्लड टेस्ट (gFOBT) एक रासायनिक प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है — इसीलिए इसमें खान-पान पर प्रतिबंध लगाने पड़ते थे और अब केवल इसका हाई-सेंसिटिविटी (High-Sensitivity) संस्करण ही अनुशंसित है। दोनों टेस्ट वह रक्त पकड़ लेते हैं जो आँखों से दिखाई नहीं देता।

आँत के अंदर देखना

कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy) एक लचीले कैमरे की मदद से पूरी बड़ी आँत (Colon) और छोटी आँत के अंतिम हिस्से की जाँच करती है, और यह एकमात्र ऐसा टेस्ट है जो एक ही सत्र में किसी समस्या को खोज भी सकता है और हटा भी सकता है। फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी (Flexible Sigmoidoscopy) केवल बड़ी आँत के बाईं ओर तक पहुँचती है; यह जल्दी होती है, इसमें कम तैयारी चाहिए, और जब संदिग्ध स्रोत नीचे की तरफ हो तो यह पर्याप्त हो सकती है। सीटी कोलोनोग्राफी (CT Colonography) बिना कैमरे के विस्तृत चित्र बनाती है, लेकिन इससे बायोप्सी (Biopsy) नहीं ली जा सकती। जब रक्तस्राव तेज़ हो और स्रोत छिपा रहे, तो सीटी एंजियोग्राफी (CT Angiography) या न्यूक्लियर मेडिसिन रेड-सेल स्कैन (Nuclear Medicine Red-Cell Scan) उसकी जगह का पता लगा सकते हैं, और जब मेलेना (Melena) या ऊपरी स्रोत का संदेह हो तो अपर एंडोस्कोपी (Upper Endoscopy) भी की जाती है।

रक्त परीक्षण जो परिणामों को मापते हैं

महीनों से चुपचाप जारी रक्तस्राव शौचालय में दिखने से पहले रक्त परीक्षण में नज़र आ जाता है। कम्पलीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count) में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) कम और लाल रक्त कोशिकाएँ छोटी व फीकी दिख सकती हैं — यह आयरन की कमी (Iron Deficiency) की पहचान है। आयरन को संग्रहीत करने वाला प्रोटीन फेरिटिन (Ferritin) सबसे पहले घटता है और यह भंडार की कमी का सबसे संवेदनशील संकेतक है। किसी भी उम्र के पुरुष में या रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद की महिला में, बिना किसी अन्य कारण के आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया (Anemia) तब तक आँत से रक्त हानि माना जाता है जब तक अन्यथा सिद्ध न हो। हमारी लाइब्रेरी में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है एनीमिया (Anemia) के लक्षण, कारण और जाँच, और एक अन्य लेख में विस्तार से बताया गया है फेरिटिन (Ferritin) कम होने के कारण और उपचार.

कोलोरेक्टल कैंसर की स्क्रीनिंग अब 45 साल की उम्र से शुरू होती है

स्क्रीनिंग (Screening) वह प्रक्रिया है जो लक्षण प्रकट होने से पहले की जाती है, और इसी कारण कई पॉलिप्स (Polyps) रक्तस्राव शुरू होने से पहले ही हटा दिए जाते हैं। यूएस प्रिवेंटिव सर्विसेज़ टास्क फोर्स (US Preventive Services Task Force) 45 से 75 वर्ष के हर वयस्क के लिए स्क्रीनिंग की सिफारिश करती है — शुरुआती उम्र 50 से घटाकर 45 इसलिए की गई क्योंकि युवा वयस्कों में कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) के मामले बढ़ रहे हैं। 76 से 85 वर्ष की उम्र में स्क्रीनिंग एक व्यक्तिगत निर्णय बन जाती है, जो समग्र स्वास्थ्य और पिछली स्क्रीनिंग के इतिहास को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

कई तरीकों को स्वीकार्य माना जाता है: हर साल FIT, हर साल हाई-सेंसिटिविटी gFOBT, हर एक से तीन साल में स्टूल DNA-FIT टेस्ट, हर दस साल में कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy), हर पाँच साल में CT कोलोनोग्राफी (CT Colonography), या हर पाँच साल में फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी (Flexible Sigmoidoscopy), या सालाना FIT के साथ मिलाकर हर दस साल में। एक बात चुनाव से भी ज़्यादा ज़रूरी है: कोलोनोस्कोपी के अलावा किसी भी टेस्ट में पॉज़िटिव रिज़ल्ट आने पर कोलोनोस्कोपी करवाना ज़रूरी है, वरना स्क्रीनिंग अधूरी रह जाती है। हाल की कवरेज इस पर नज़र डालती है कोलन कैंसर स्क्रीनिंग के लिए एक ब्लड टेस्ट.

स्क्रीनिंग उन लोगों पर लागू होती है जिनमें कोई लक्षण नहीं होते। मलद्वार से दिखाई देने वाला रक्तस्राव एक लक्षण है, और इसके लिए स्क्रीनिंग टेस्ट की बजाय डायग्नोस्टिक जाँच की ज़रूरत होती है।

नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति

पिछले तीन वर्षों में शोध का ध्यान नए उपचारों से हटकर एक व्यावहारिक सवाल पर केंद्रित हुआ है: किसे कोलोनोस्कोपी की ज़रूरत है, और कितनी जल्दी? हाल के अध्ययन इस बारे में क्या बताते हैं, यहाँ जानें।

स्टूल टेस्ट यह तय करने में मदद करता है कि पहले किसे कैमरा टेस्ट की ज़रूरत है

2025 के एक स्कॉटिश अध्ययन में उन लोगों को फॉलो किया गया जिन्हें रेक्टल ब्लीडिंग के कारण अस्पताल रेफर किया गया था, और यह जाँचा गया कि फीकल इम्यूनोकेमिकल टेस्ट (Fecal Immunochemical Test) उन्हें जोखिम के आधार पर वर्गीकृत कर सकता है या नहीं। एक सैंपल से अच्छे नतीजे मिले और दो सैंपल से और बेहतर: जिन लोगों के मल में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) नहीं पाया गया, उनमें कैंसर की संभावना बहुत कम थी, जबकि अधिक रीडिंग वाले लोगों में मामले ज़्यादा पाए गए। उसी टीम का 2023 में प्रकाशित एक पहले का विश्लेषण भी एक की बजाय दो सैंपल लेने के बारे में इसी निष्कर्ष पर पहुँचा था। आपके लिए इसका मतलब: अगर आपके डॉक्टर खून दिखाई देने के बावजूद स्टूल सैंपल माँगते हैं, तो यह देरी की कोई चाल नहीं है — यह यह तय करने में मदद करता है कि कैमरा टेस्ट कितनी जल्दी ज़रूरी है। ये नतीजे एक स्वास्थ्य प्रणाली के रेफरल क्लीनिक से आए हैं, इसलिए स्थानीय तरीके अलग हो सकते हैं, और स्टूल टेस्ट में कुछ न मिलना उन लक्षणों को कभी नकारता नहीं जो बने रहते हैं।

रक्तस्राव उन लक्षणों में से एक है जो अक्सर निदान तक पहुँचाते हैं

ब्रिटिश सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी (British Society of Gastroenterology) के 2024 के एक विश्लेषण में एक राष्ट्रीय एंडोस्कोपी डेटाबेस — एक रजिस्ट्री जो हर प्रक्रिया में मिले निष्कर्षों को दर्ज करती है — का उपयोग करके यह जाँचा गया कि कौन से रेफरल लक्षण वास्तव में कोलोनोस्कोपी में कैंसर के निदान तक पहुँचे। रेक्टल ब्लीडिंग और एनीमिया (Anemia) विशेष रूप से उभरे, खासकर जब दोनों एक साथ हों और बुज़ुर्ग मरीज़ों में, जबकि कई अन्य रेफरल कारणों से बहुत कम मामले सामने आए। आपके लिए इसका मतलब: गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट रक्तस्राव को एक ठोस कारण से गंभीरता से लेते हैं, और इसे कम करके बताने की बजाय सटीक रूप से बताना फायदेमंद है।

युवा वयस्कों में कोलोरेक्टल कैंसर: एक वास्तविक संकेत और एक जारी बहस

नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं द्वारा 2025 के एक विश्लेषण ने पुष्टि की कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 50 वर्ष से कम उम्र के वयस्कों में कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) का निदान अधिक बार हो रहा है, और यही वह प्रवृत्ति है जिसके कारण स्क्रीनिंग की उम्र कम की गई। 2025 में एक सामान्य चिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित एक टिप्पणी में तर्क दिया गया कि कम उम्र में होने वाले कैंसर (Early-Onset Cancer) में जो स्पष्ट वृद्धि दिखती है, उसका एक हिस्सा अधिक बीमारी की बजाय अधिक गहन जांच को दर्शाता है, और आंकड़ों को पढ़ते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई। आपके लिए इसका क्या अर्थ है: युवा मरीजों की संख्या में वृद्धि इतनी वास्तविक है कि दिशानिर्देश बदल गए, फिर भी इसका यह मतलब नहीं कि मल में थोड़ी-सी खून की लकीर देखने वाला कोई युवा वयस्क सबसे बुरा मान ले। इसका यह जरूर मतलब है कि 50 वर्ष से कम उम्र होना अब जांच न कराने का कारण नहीं है।

शुरुआती उम्र पर अन्य देशों में अभी भी विचार-विमर्श जारी है

2026 की एक समीक्षा में यह सवाल उठाया गया कि क्या अन्य देशों को संयुक्त राज्य अमेरिका का अनुसरण करते हुए 50 की बजाय 45 वर्ष की उम्र से मल-आधारित स्क्रीनिंग (Stool-Based Screening) शुरू करनी चाहिए। इसमें जल्दी पकड़े गए कैंसर के फायदों को अतिरिक्त कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy), एंडोस्कोपी सेवाओं पर बोझ और ओवरडायग्नोसिस (Overdiagnosis) के जोखिम — यानी ऐसी वृद्धि जो कभी नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन फिर भी पाई और उपचारित की जाती है — के विरुद्ध तौला गया। आपके लिए इसका क्या अर्थ है: विभिन्न देशों में सिफारिशें इसलिए अलग-अलग हैं क्योंकि यह संतुलन वास्तव में बहुत नाजुक है। अपने चिकित्सक से पूछें कि आपके देश में कौन-सा कार्यक्रम लागू होता है और आपका अपना इतिहास उसे कैसे प्रभावित करता है।

शब्दकोष

अवधिपरिभाषा
एंजियोडिसप्लेसिया (Angiodysplasia)आंत की दीवार में असामान्य रूप से फैली हुई नाजुक छोटी रक्त वाहिकाएं। ये बुजुर्ग वयस्कों में धीमे और बार-बार होने वाले रक्तस्राव का एक सामान्य कारण हैं।
एनोस्कोपी (Anoscopy)एक छोटी कठोर ट्यूब का उपयोग करके गुदा नलिका (Anal Canal) और निचले मलाशय (Lower Rectum) को देखने के लिए क्लिनिक में की जाने वाली एक संक्षिप्त जांच। यह कुछ ही सेकंड में बवासीर (Hemorrhoids) या गुदा विदर (Anal Fissure) की पुष्टि कर सकती है।
डाइवर्टिकुला (Diverticula)छोटी थैलियां जो बड़ी आंत (Colon) की दीवार के कमजोर स्थानों से बाहर की ओर उभर आती हैं। उम्र के साथ ये सामान्य हैं और आमतौर पर कोई लक्षण नहीं देती, लेकिन किसी थैली पर खिंची हुई रक्त वाहिका अचानक रक्तस्राव कर सकती है।
फेकल इम्यूनोकेमिकल टेस्ट (FIT)एक मल परीक्षण (Stool Test) जो मानव हीमोग्लोबिन (Human Hemoglobin) का पता लगाने के लिए एंटीबॉडी (Antibodies) का उपयोग करता है। इसके लिए किसी आहार संबंधी तैयारी की जरूरत नहीं होती और इसका उपयोग स्क्रीनिंग और लक्षणों की जांच दोनों के लिए किया जाता है।
ferritinशरीर में आयरन (Iron) को संग्रहीत करने वाला प्रोटीन। जब आयरन के भंडार कम होने लगते हैं तो रक्त में इसका स्तर जल्दी गिर जाता है, जो इसे दीर्घकालिक रक्त हानि (Chronic Blood Loss) का एक संवेदनशील संकेतक बनाता है।
हीमोग्लोबिनलाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद आयरन युक्त प्रोटीन जो ऑक्सीजन वहन करता है। जब रक्त आंत से गुजरता है तो इसका टूटना ही मल को काला कर देता है।
मेलेना (Melena)काला, चिपचिपा, तारकोल जैसा मल जिसमें तेज विशिष्ट गंध होती है, जो पचे हुए रक्त के कारण होता है। यह आमतौर पर पेट (Stomach) या ऊपरी छोटी आंत (Upper Small Intestine) में रक्तस्राव की ओर संकेत करता है।
ऑकल्ट ब्लड (Occult Blood)मल में इतनी कम मात्रा में मौजूद रक्त जो आंखों से दिखाई न दे और केवल प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा ही पता चल सके।
पॉलिप (Polyp)बृहदान्त्र (Colon) या मलाशय (Rectum) की आंतरिक परत पर उगने वाली एक वृद्धि (Growth)। अधिकांश हानिरहित होती हैं, लेकिन कुछ प्रकार धीरे-धीरे कैंसर में बदल सकती हैं, इसीलिए मिलने पर इन्हें हटा दिया जाता है।
प्रोक्टाइटिस (Proctitis)मलाशय (Rectum) की परत में सूजन। इसके कारणों में श्रोणि (Pelvis) पर रेडिएशन थेरेपी, कुछ संक्रमण और इन्फ्लेमेटरी बाउल डिज़ीज़ (Inflammatory Bowel Disease) शामिल हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों

मुझे बिना दर्द के मलाशय (Rectum) से रक्तस्राव क्यों हो रहा है?

बिना दर्द के रक्तस्राव होना एक सामान्य स्थिति है, कोई असाधारण बात नहीं। आंतरिक बवासीर (Internal Hemorrhoids) उस बिंदु से ऊपर होती हैं जहाँ गुदा नलिका (Anal Canal) में दर्द महसूस करने वाली नसें होती हैं, इसलिए इनसे अक्सर बिना किसी दर्द के चमकीला लाल रक्त निकलता है। डाइवर्टिकुलर ब्लीडिंग (Diverticular Bleeding) और एंजियोडिसप्लेज़िया (Angiodysplasia) भी आमतौर पर दर्दरहित होते हैं, और अधिकांश पॉलिप्स (Polyps) तथा कई शुरुआती ट्यूमर भी ऐसे ही होते हैं। इसलिए दर्द का होना या न होना अपने आप में न तो आश्वस्त करने वाला है और न ही चिंताजनक; यह केवल संभावित कारणों की सूची को सीमित करने में मदद करता है। गुदा विदर (Anal Fissure) में तेज़ दर्द होता है, बवासीर में आमतौर पर नहीं होता, और खूनी दस्त के साथ ऐंठन वाला दर्द सूजन या बृहदान्त्र (Colon) में रक्त आपूर्ति कम होने की ओर इशारा करता है। चूँकि बिना दर्द का रक्तस्राव सबसे सामान्य और कुछ गंभीर कारणों दोनों में हो सकता है, इसलिए इसका मूल्यांकन ज़रूर करवाना चाहिए।

मल में चमकीला लाल रक्त दिखे तो मुझे कब चिंता करनी चाहिए?

किसी युवा वयस्क में कठोर मल के साथ टिशू पेपर पर एक हल्की लकीर, जिसके साथ कोई अन्य लक्षण न हो, आमतौर पर गुदा (Anal) क्षेत्र से होती है और इसे किसी नियमित जाँच के दौरान डॉक्टर को बताया जा सकता है। लेकिन तुरंत ध्यान दें यदि: रक्त मल की सतह पर न होकर उसके अंदर मिला हुआ हो; एक-दो हफ्ते से अधिक समय से बार-बार हो रहा हो; आपकी उम्र 45 वर्ष या उससे अधिक हो; आप ब्लड थिनर या नियमित रूप से एंटी-इन्फ्लेमेटरी दर्दनिवारक दवाएँ लेते हों; या इसके साथ मल त्याग की आदत में स्थायी बदलाव, अकारण वज़न घटना, थकान या पेट दर्द भी हो। भारी रक्तस्राव, बड़े थक्के, चक्कर आना या बेहोशी होने पर उसी दिन आपातकालीन विभाग (Emergency Department) में जाएँ।

इसका क्या मतलब है अगर पोंछते समय रक्त आए लेकिन मल में न हो?

केवल टिशू पेपर पर रक्त आना, जबकि मल साफ हो, आमतौर पर यह दर्शाता है कि स्रोत बिल्कुल बाहरी निकास पर है — अक्सर गुदा विदर (Anal Fissure) या आंतरिक बवासीर (Internal Hemorrhoid) जो मल निकलते समय रक्तस्राव करती है। यह सबसे कम चिंताजनक स्थिति है, खासकर जब यह कठोर मल या ज़ोर लगाने के बाद हो और कुछ दिनों में बंद हो जाए। फिर भी इसे किसी चिकित्सक को बताना उचित है, विशेष रूप से 45 वर्ष की आयु के बाद, क्योंकि मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में कोई घाव (Lesion) भी बिल्कुल यही तस्वीर पेश कर सकता है। यदि यह स्थिति बदले, या मल में भी रक्त आने लगे, तो इसकी जाँच ज़रूर करवाएँ।

घर पर मलाशय (Rectum) से रक्तस्राव कैसे रोकें?

घरेलू उपाय मुख्य रूप से मलद्वार (Anal) से जुड़े सामान्य कारणों पर ध्यान देते हैं, न कि सीधे रक्तस्राव पर। मल को नरम करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है: भोजन या सप्लीमेंट से अधिक फाइबर लें, पर्याप्त पानी पिएं, और जब भी शौच की इच्छा हो तो उसे रोकें नहीं। सिट्ज़ बाथ (Sitz Bath), यानी 10 से 15 मिनट तक कुछ इंच गर्म पानी में बैठना, गुदा की मांसपेशियों को आराम देता है और फिशर (Fissure) के दर्द को कम करता है। जोर लगाने से और लंबे समय तक शौचालय में बैठने से बचें। बिना पर्चे के मिलने वाली क्रीम और सपोसिटरी (Suppository) लक्षणों में राहत दे सकती हैं, लेकिन ये कारण का इलाज नहीं करतीं। ये सभी उपाय यह जानने की जगह नहीं ले सकते कि खून कहाँ से आ रहा है, और यदि रक्तस्राव कुछ दिनों से अधिक समय तक जारी रहे, तो किसी और उपाय की बजाय डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।

क्या बवासीर (Hemorrhoids) से शौचालय में बहुत अधिक खून आ सकता है?

हाँ। बवासीर से होने वाला रक्तस्राव देखने में डरावना लग सकता है, क्योंकि थोड़ी-सी मात्रा में खून भी शौचालय के पानी में फैलकर बहुत अधिक दिखता है, और आंतरिक बवासीर (Internal Hemorrhoids) कभी-कभी इतना खून बहाती है कि वह लगातार टपकता रहता है। फिर भी, बिना जाँच के यह मान लेना सही नहीं है कि अधिक खून बवासीर की वजह से ही है। डाइवर्टीकुलर ब्लीडिंग (Diverticular Bleeding) भी ठीक इसी तरह अचानक, बिना दर्द के और भारी मात्रा में होती है, और यह बड़ी आंत (Colon) में काफी ऊपर से आती है। यदि खून इतना अधिक हो कि पैड भीग जाए, उसमें बड़े थक्के हों, या साथ में चक्कर आना, कमज़ोरी या दिल की धड़कन तेज़ होना जैसे लक्षण हों, तो यह एक आपातकालीन स्थिति है — चाहे पहले कोई भी निदान क्यों न किया गया हो।

क्या मल में खून आने का मतलब हमेशा कैंसर होता है?

नहीं। अधिकतर रक्तस्राव बवासीर (Hemorrhoids), गुदा फिशर (Anal Fissure), डाइवर्टिकुला (Diverticula) या सूजन की वजह से होता है, और कैंसर इसके कारणों में बहुत कम मामलों में होता है — खासकर 50 साल से कम उम्र में। फिर भी डॉक्टर जाँच करते हैं, क्योंकि केवल रक्तस्राव के तरीके से यह भरोसे के साथ नहीं कहा जा सकता कि कारण सामान्य है या कोई शुरुआती ट्यूमर। और यदि कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) शुरुआती अवस्था में पकड़ा जाए, तो उसका इलाज बहुत प्रभावी होता है। जाँच के लिए भेजा जाना यह संकेत नहीं है कि आपके डॉक्टर को कैंसर का संदेह है — यह तो बस उस संभावना को दूर करने का तरीका है, ताकि असली कारण का इलाज किया जा सके।

सूत्रों का कहना है

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  • Cleveland Clinic — Blood in Stool (Rectal Bleeding) — my.clevelandclinic.org
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  • Rabeneck L et al. — Should we screen for colorectal cancer with biennial FIT beginning at age 45 in Canada? — Journal of the Canadian Association of Gastroenterology, 2026 — consensus.app

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